भारतीय महिलाओं में बढ़ रहा है हड्डियों को खोखला बना देने वाली खामोश बीमारी का खतरा

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  • ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां कमजोर हो जाती है जिसके कारण वे आसानी से टूट जाती हैं। इसके कोई लक्षण प्रकट नहीं होते हैं जिसके कारण इसे खा​मोश बीमारी भी कहा जाता है क्योंकि जब तक रोगी को फ्रैक्चर नहीं हो जाता तब तक इसका पता नहीं चलता है।
  • ओस्टियोपोरोसिस अब अपेक्षाकृत युवा लोगों में भी आम होती जा रही है। अब 35-40 साल की उम्र के युवा लोगों में भी बोन मिनरल डेंसिटी कम पायी जाती है।
  • ऑस्टियोपोरोसिस से बचा जा सकता है या कम से कम इसकी शुरुआत में स्वस्थ आहार और सक्रिय जीवनशैली का पालन करके देरी की जा सकती है।

सामाजिक सांस्कृतिक कारणों से धूप से बचने की प्रवृति, कैल्शियम युक्त आहार के कम सेवन तथा बढ़ते प्रदूषण के कारण भारत में महिलाओं में हड्डियों को खोखला बना देने वाली खामोश बीमारी ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ रहा है। हमारे देश में कम उम्र की लड़कियों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं तथा रजोनिवृति महिलाओं में आदतन कैल्शियम का सेवन कम होता है, जो ओस्टियोपोरोसिस का मुख्य कारण है।

आर्थराइटिस केयर फाउंडेशन (एएफसी) के अध्यक्ष तथा नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ आर्थोपेडिक सर्जन डा. राजू वैश्य बताते हैं कि भारतीयों में जीवन प्रत्याशा बढने के साथ-साथ महिलाओं में विटामिन डी की कमी का प्रकोप भी बढ़ रहा है। विटामिन डी की कमी की व्यापक समस्या के साथ-साथ कम मात्रा में कैल्शियम के सेवन, ओस्टियोपोरोसिस के बारे में बहुत कम जागरूकता तथा भारतीय महिलाओं में ओस्टियोपोरोसिस की पहचान में दिक्कत जैसे कारणों से भारत में खास तौर पर भारतीय महिलाओं में ओस्टियोपोरोसिस एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या बन गई हे।

ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों को भुरभुरी एवं खोखली बना देने वाली ऐसी बीमारी है जिसके कारण हड्डियां आसानी से टूट जाती हैं। इसे खामोश बीमारी भी कहा जाता है क्योंकि जब तक रोगी को फ्रैक्चर नहीं हो जाता तब तक इसका पता नहीं चलता है। इस बीमारी में हड्डियां इस हद तक कमजोर हो जाती हैं कि हल्के झटका लगने, गिर जाने और यहां तक कि छींकने और खांसने से भी फ्रैक्चर हो सकता है। हालांकि यह स्थिति अचानक उत्पन्न नहीं होती है, बल्कि उम्र बढ़ने के साथ विकसित होती है और तेजी से बढ़ती है। ओस्टियोपोरोसिस अब अपेक्षाकृत युवा लोगों को भी हो रही है।

इंडियन कार्टिलेज सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. राजू वैश्य कहते हैं, ‘‘हमारे पास आने वाले 100 वृद्ध लोगों में 30 प्रतिशत लोग ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित होते हैं। हमारे आर्थराइटिस केयर फाउंडेशन की ओर से आयोजित होने वाले मेडिकल कैम्पों में आने वाले अब हम 35-40 साल की उम्र के युवा लोगों में भी बोन मिनरल डेंसिटी कम पायी जाती है जिसके कारण उनमें ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा अधिक होता है। युवा लोग आधुनिक जीवनशैली, निष्क्रिय रहने की आदत, शराब और तंबाकू का सेवन, धूम्रपान, अधिक कैलोरी और जंक फूड का सेवन जैसी शहरी खान-पान की आदतें, भोजन में मिलावता और कम उम्र में मधुमेह रोग और मधुमेह मेलिटस विकसित होने की वजह से इस बीमारी के प्रति अधिक संवेदनशील हो रहे हैं।’’

यह बीमारी परंपरागत रूप से, रजोनिवृत्ति तक पहुंचने के बाद महिलाओं में अधिक होती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत में लगभग 80 प्रतिशत महिलाएं, अर्थात हर चार में से तीन से अधिक महिलाएं ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित होती हैं और 50 वर्ष से अधिक उम्र की और रजोनिवृत्त हो चुकी महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा अधिक होता है।

महिलाएं इस बीमारी से अधिक प्रभावित क्यों होती हैं, इस बारे में डॉ. राजू वैश्य ने कहा, “पुरुषों की तुलना में महिलाओं की हड्डी का घनत्व कम होता है, और उनमें उम्र बढ़ने के साथ हड्डी के द्रव्यमान में अधिक तेज़ी से कमी आती है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस होता है। ऐसा एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण होता है। यह  हार्मोन महिला के प्रजनन चक्र को नियंत्रित करने में मदद करता है, और साथ ही, पुरुषों और महिलाओं दोनों में हड्डियों को मजबूत और स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रजोनिवृति से पहले महिलाओं में पुरुषों की तुलना में अधिक एस्ट्रोजेन होता है, लेकिन रजोनिवृत्ति के बाद उनमें एस्ट्रोजेन के उत्पादन में तेजी से कमी आती है इसलिए उनमें तेजी से हड्डी का नुकसान होता है और ऑस्टियोपोरोसिस होने की संभावना अधिक हो जाती है।’’

हड्डी और मानव कंकाल प्रणाली को मजबूत करने में पर्याप्त और स्वस्थ आहार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्वस्थ आहार और सक्रिय जीवनशैली का पालन करके ऑस्टियोपोरोसिस से बचा जा सकता है या कम से कम इसकी शुरुआत में देरी की जा सकती है।

आहार से ऑस्टियोपोरोसिस का प्रबंधन

ऑस्टियोपोरोसिस से बचने के लिए, विशेष रूप से, कैल्शियम, प्रोटीन, मैग्नीशियम और विटामिन डी से समृद्ध आहार महत्वपूर्ण है। इससे बचने के लिए निम्नलिखित स्वस्थ आहार का सेवन करना चाहिए।

— अपने आहार में कैल्शियम युक्त भोजन को शामिल करें। कैल्शियम हड्डी को मजबूत करता है। वसा रहित दूध, दही, ब्रोकोली, फूलगोभी, सैल्मन जैसी कुछ प्रकार की मछली, बादाम, और हरी पत्तेदार सब्जियां कैल्शियम के  उत्कृष्ट स्रोत हैं।

— दाल, राजमा, अनाज, फलियां और बीज जैसे प्रोटीन से समृद्ध खाद्य पदार्थ शरीर को मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। स्वस्थ मांसपेशियां हड्डियों को सहारा प्रदान करती हैं।

— तंबाकू और शराब के सेवन को जितना संभव हो सके कम करना चाहिए। लाल मांस और कैफीन से बचना चाहिए।

— इसके अलावा, डॉक्टर की सलाह से कैल्शियम सप्लिमेंट भी लेना चाहिए।

हालांकि व्यायाम से हड्डी घनत्व में वृद्धि नहीं होती है, लेकिन यह कई प्रकार से स्वास्थ्य में सुधार करता है और ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने में भी मदद करता है।

— शरीर के जिन अंगों में पहले फ्रैक्चर हो चुका हो, उन अंगों का व्यायाम नहीं करें। यह अनावश्यक इंजुरी का कारण बन सकता है।

— शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं और दैनिक दिनचर्या में व्यायाम को शामिल करें। वजन उठाने वाले व्यायाम और दौड़ना, चलना, कूदना जैसी शारीरिक गतिविधियां शरीर के अच्छे संतुलन और मुद्रा को बनाए रखने में मदद करते हैं।

— योगाभ्यास करें, क्योंकि यह शरीर में लचीलापन और ताकत बढ़ाता है।

स्वास्थ्य लेख: विनोद कुमार द्वारा

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